कठपुतली
हम सब तो रंगमंच की कठपुतलीया है, जहाँपनाह।
ऐसी कठपुतलीया जिनकी डोर ऊपर वाले के हाथ होती है।
कठपुतली एक और उससे बंधी कई सारी डोर |
बच्चे-बीबी की डोर
मा-बाप की डोर
भाई बहन, रिश्तेदारो की डोर
घर खरीदने की डोर
घर को संवारने की डोर
कार की, और एक और कार की डोर
कभी वेकेशन की डोर
हररोज़ रोज़बरोज़ की डोर
काम की डोर
काम के लिए करनी पड़ती कम्युटिंग की डोर
ऑफिस की डोर
सहकर्मचारियो की डोर
फंडर्स की और डोनर्स की डोर
एकाउंट्स की, HR की और एडमिन की डोर
रजिस्ट्रार की डोर
डिरेक्टर और प्रेसिडेंट की डोर
कभी उन दोनों के PA की डोर
जाने अनजाने प्रेशर की डोर
ईस कमिटी, उस ग्रुप, वो वाले इन्चार्ज की डोर
कभी सिस्टम की डोर
तो कभी सिस्टम के अभाव की डोर
स्टूडेंट्स की और mentee की डोर
स्टूडेंट फीडबेक की डोर
50% सैलरी की डोर
रिपोर्ट और आर्टिकल की डोर
फर्स्ट ऑथरड, इंडेक्स्ड जर्नल वाले पब्लिकेशन की डोर।
न जाने कितनी डोर और कितने ऊपर वाले।
और हम सब रंगमंच की कठपुतलीया
अनगिनत डोर से बंधी बस कठपुतलीया...
कल ही inaugurate हुए नए परिसर की हॉस्टल के एक कमरे की सीलिंग फैंन से टंगि एक ऐसी ही इंसान सी कठपुतली मिली।
न जाने क्यों, न जाने कैसे खुदसे लगी उन अनगिनत डोर का फंदा सा बना लिया था उसने।
और पीछे दीवाल पे लिख के गई - I Quit।
Comments
Post a Comment