आदत

 

हर सांस गम को पीकर,

जीने की आदत हो गयी

टूटी कश्ती, तेज हवाएं,

संभलने की आदत हो गयी

 

अपने घर का माहोल ही क्या,

मेजबान हम, मेहमां भी हम

साक़िया को पास बिठा के

पिने को आदत हो गयी

 

ख्वाबो खयालो की मंजिल,

पाने को साथ भी सपनों का

खुद को जिंदगी दूर से ही

दिखाने की आदत हो गयी

 

रिश्ते नाते सब नाम के,

हम भी नहीं हैं कुछ काम के

ज़माने को अजब नाम के

खिलोने की आदत हो गयी

 

टूटी कश्ती, तेज हवाएं,

संभलने की आदत हो गयी

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