आंधी
आंधी ये एहसासों की
पल पल रुला जाती हैं
देख के मासूम अश्कोको
बचपन की याद आती हैं
ख़यालात क्यूँ हैं ऐसे
की बगावत जमानेसे हो
हर बात में, हर साँस में
सवालो की बारात आती हैं
गर फूल हो बहार का,
दिल करता हैं मचलने को
दो पल ख़ुशी के जैसे गए
पतझड़ पीछे आ जाती हैं
दिल करता हैं बना डालू
खुद को इस ज़माने जैसा
कल तक सब्र कर 'अजब'
रूह् से आवाज आती हैं
पल पल रुला जाती हैं
पल भर हँसा जाती हैं
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