वो आते हैं, समजाते हैं
जबभी कभी घभराते हैं
वो आते हैं, समजाते हैं
कभी कभी वीरान सफरमे
जो उलज़े अनजान डगरमे
मंज़िल के अंधियारे पथ मे
हर शयमे दीप जलाते हैं
सच और प्रेम की सौगातें
क्षमा और ज्ञान की बातें
खुद ही को मिसाल बना के
जीने की राह दिखाते हैं
ज़िन्दगी तो हैं इम्तिहां
चलते रहना हैं इल्तिजा
बेटो मे बाबाको देखकर
बाबा का फ़र्ज़ निभाते हैं
सदा रहेंगे वो साथ में
सालो-सदियाँ, पास में
वक्त और जगह से परे
हरदम प्यार जताते हैं
जबभी कभी घभराते हैं
वो आते हैं, समजाते हैं
Comments
Post a Comment