नहीं जरूरत हमें समजाने की
नहीं जरूरत हमें समजाने की
कैसी हवा हैं अभीं जमाने की
शमा जलती हैं, औरो के लिए
भले ही पड़े लाश परवाने की
दिल से तू कर दे रुखसत मुझे
नहीं अपनानी बात फसाने की
थोडी खुशी के लिए क्यों अजब
डाले आदत दिल बहेलानी की
नहीं जरूरत हमें समजानेकी
कैसी हवा हैं अभीं जमानेकी
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