इश्क की बात
कथा अनकही बुनी हैं, क्या इश्क की बात हैं?
बेवजह बेबयाँ सुनी हैं, क्या इश्क की बात हैं?
उभरते रिश्तों का वजूद, मैं ढूँढू मन के शोर में
दिल ने ख़ामोशी चुनी हैं, क्या इश्क की बात हैं?
भागता ही रहता हू, रिश्तों किरदारो की दौड में,
फिर क्यूं ये झुन्झुनी हैं, क्या इश्क की बात हैं?
मन्नते उनसे मांगना हमें तो कभी आया नहीं
रब ने किसकी सुनी हैं, क्या इश्क की बात हैं?
दस्तक-ए-खुदा सुन लेते हैं, एक अरसे से अजब
चीख ये नयी अनसुनी हैं, क्या इश्क की बात हैं?
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