बम्बई - चलता फिरता अलमस्त शहर
आइये
अपनी किस्मत आजमाइए
आइये, जाइए, पाइए, गवाईये
किंमत अपनी फरमाइए
सब हैं प्यादे, सबका ये खेल
फूंक फूंक कर, समज समज कर
सागरके सामने खुद समन्दर
चलता फिरता अलमस्त शहर
शरीर शराब एक ही दाम
तुज को भला तेरा सब काम
लोकल के आदी लोकल सारे
करम के या किस्मत के मारे
दिलो दिमाग जहर जहर
नयी आस हर सहर सहर
सागरके सामने खुद समन्दर
चलता फिरता अलमस्त शहर
रंडी, भाई, फिलम, और सट्टा
हरकोई राजा, चौराहा अड्डा
कितना तेज, कितना प्रबल
अजीबोगरीब, कितना सरल
सहमा सहमा, कहर कहर
रंग बदलता प्रहर प्रहर
सागरके सामने खुद समन्दर
चलता फिरता अलमस्त शहर
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