चले थे

 मुश्किल सफरमें तन्हा से

ख्वाबो के ही  साथ चले थे

  

हर मक़ाम पे अटक से जाते

खुद ही समजे और समजाते

फिरसे खुदको दिखा के सपने

बे-हमराही की राह चले थे

 

कुछ अलग से हैं ख़याल हमारे

जमाने से जुदा हैं हाल हमारे

 ना समज हैं, समजा नहीं पाते

किस मोड पे कैसे कहा चले थे

 

पूछा जब भी  हमने खुदा से

 मिलता क्या हैं खाली दुआसे

 मांगी मौत मरे है, वो सब जो

अजब सी तनहा राह चले थे

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