दो कदम
राहें मुड ही जाएगी, दो कदम चलकर
बात समज आ जाएगी, दो कदम चलकर
लगता हो भले की मान गयी हैं दुनिया
सवाल कुछ तो उठाएगी, दो कदम चलकर
हसीन यादोको लिए, चिपक गए हैं राहों में
शायद फिरसे गुदगुदाएगी, दो कदम चलकर
हसरत, इश्क और आग, तासीर हैं तिनोकी
अंजाम कुछ तो लाएगी, दो कदम चलकर
रुकी हैं ज़िन्दगी, डरके अन्जान राहो से
आदत सी हो जाएगी, दो कदम चलकर
ना कर समजोता, मुश्किलों को जाना ही हैं
बात बन ही जाएगी, दो कदम चलकर
वाईज बनने निकले, छोडके कलम 'अजब'
अश्कोकी आंधी
आएगी, दो कदम चलकर
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