जिंदगी की चिन्गारी

 

कुछ पानेको जाते हैं,

कुछ गवांके आते हैं

जिंदगी की चिन्गारीको

धुएंमे उडाए जाते हैं

 

पगले दिल दिवानेसे,

न पूछो इन दिनोकी हालात

पलमे बिगड़ना, फिरसे संभालना

चुपकेसे चिल्लाये जाते हैं

 

अपने घरका माहोल ही क्या

मेजबां हम, महेमां भी हम

खुदसे कहेते आओ जनाब

खुदही पिलाये जाते हैं

 

पलभरमें रूठी वो

सच्ची बात बताई जो

हैरान जिन्दगीको मनाने

कलम उठाये जाते हैं

 

राहमे अपनी सबसे मिले

अपना हमराही कोई नहीं

अकेले अजब अंदाजमे हम

अजबसे सफरमे जाते हैं


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