कुछ इस तरह से जा रही हैं ज़िन्दगी
कुछ इस तरह से जा रही हैं ज़िन्दगी..
ना मंजिलका पता हैं
ना निशान राहों के
कुछ तय नहीं, कहा जाना हैं
बस इतना जरूर हैं
नहीं हैं रुकना
बस चलते ही जाना हैं |
लगता हैं कभी
बे-मंजिल हैं ये सफ़र
निकले हैं सबब परछाईंका ढूंढने
कुछ पाना हैं, जो हैं खुद में ही
पता नहीं क्यूँ
फिर भी तलाश ज़ारी हैं |
वो दिन भी आएगा
होगी एक लहर सुकून की
एक पूर्ण अनुभूति,
'वो' कुछ पा लेने की |
कर रहे हैं बात
अपने खुदा से
आप जिसे कहते हैं बंदगी
कुछ इस तरह से जा
रही हैं ज़िन्दगी |
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