पुरानी राहें
अन्जान सी लगती हैं पुरानी राहें
परेशान सी करती हैं पुरानी राहेंसाथ चुपकेसे निभाती रही उम्रभर
अब वजूद चाहती हैं पुरानी राहेंचलते चलते पहुचना भी हैं कही
मंजिले तलाशती हैं पुरानी राहेंरुके या गुजर जाए, क्यों कहा जाये
पहेलीया बुझाती हैं पुरानी राहेंचौराहेकी उलझन सुलझाये कैसे
गिनतियाँ समझाती हैं पुरानी राहेंसजाके सवालोकी बारात अजब
यूँ दिल बहलाती हैं पुरानी राहें
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